खास रिपोर्ट – जानिए ‘मनरेगा’ के बेहतर क्रियान्वयन के कारण छत्तीसगढ़ ने देश के विकसित राज्यों को कैसे पछाड़ा

खास रिपोर्ट - जानिए 'मनरेगा' के बेहतर क्रियान्वयन के कारण छत्तीसगढ़ ने देश के विकसित राज्यों को कैसे पछाड़ा

रायपुर – सेंटर फार माॅनिटरिंग इंडियन इकोनाॅमी की यानी सीएमआईई की हाल ही में जारी रिपोर्ट में यह बताया गया था कि देश में बेरोजगारी की दर में जहां बढ़ोतरी हुई, वहीं छत्तीसगढ़ में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर 12 महीने के सबसे निचले स्तर पर 3.4 फीसदी दर्ज की गई, जो कि राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 23.5 फीसदी से काफी कम है. सीएमआईई के अनुसार छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर सितंबर 2018 में जहां 22.2 फीसदी थी, वह घटकर अब 3.4 फीसदी पर आ गई.

जब देश के तमाम राज्य भीषण अर्थ संकट से जूझ रहे हैं, बेरोजगारी के तमाम उपक्रम बेपटरी होते जा रहे हैं, सरकारों का राजस्व तेजी से घट रहा है, हर जतन औंधे मुंह धाराशायी हो रहे हैं, ऐसी तस्वीर के बीच आखिर छत्तीसगढ़ ने ऐसा कौन सा साधन चुना, जिसने चुनौतियों को आइना दिखाने का काम किया? सूबे की भूपेश बघेल सरकार की वह कौन सी नीति थी, जिसने लगभग पिछड़े राज्य में रोजगार के नए आयाम सृजित किए? कोरोना संक्रमण की दहशत से दूसरे राज्यों की तरह ही जब छत्तीसगढ़ में भी लाखों मजदूरों की घर वापसी हुई, तब संकट से घिरे बादलों के बीच उम्मीदों की किरण कैसे जगाई गई?

इन तमाम सवालों का जवाब है, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा. भूपेश सरकार का एक ही शस्त्र था, जिसने ढाल बनकर हर चुनौतियों से सामना किया. आर्थिक मजबूती के लिए पलायन कर चुके परिवार को जब अनिश्चितता भरे माहौल में लौटना पड़ा, तब मनरेगा योजना ही रही, जिसने ईंधन बनकर जिंदगी की गाड़ी को खिंचने का काम किया. तमाम संकटों के बीच मनरेगा की नीति के बेहतर क्रियान्वयन का ही नतीजा है कि रोजगार देने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल स्थान पर रहा. देशभर में मनरेगा कार्यों में लगे कुल मजदूरों में से करीब 24 फीसदी मजदूर अकेले छत्तीसगढ़ के रहे. आरबीआई ने भी छत्तीसगढ़ में कोरोना संकट के दौरान किए गए प्रयासों को खूब सराहा. अपनी रिपोर्ट में आरबीआई ने छत्तीसगढ़ में आर्थिक विकास की दर को अन्य विकसित राज्यों की तुलना में काफी बेहतर बताया है.

मनरेगा कार्यों में आधी आबादी यानी महिलाओं की भागीदारी आधी से ज्यादा रही?

छत्तीसगढ़ में मनरेगा कार्यों में आधी आबादी यानि महिलाओं की भागीदारी आधी से ज्यादा रही. चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के शुरूआती चार महीनों में यहां योजना के तहत 24 लाख 28 हजार 234 महिलाओं को काम मिला. राज्य में सृजित कुल नौ करोड़ 17 लाख 87 हजार मानव दिवस रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी 4 करोड़ 65 लाख 85 हजार रही. मनरेगा कार्यों में इस साल अब तक महिलाओं की भागीदारी 50.75 फीसदी रही है जो पिछले चार वर्षों में सर्वाधिक है. राज्य में इस साल विभिन्न मनरेगा कार्यों के अंतर्गत कुल 48 लाख 14 हजार 330 मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया गया. इनमें 24 लाख 28 हजार 234 महिला श्रमिक शामिल है.

मनरेगा कार्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2016-17 में इसमें महिलाओं की भागीदारी 49.31 प्रतिशत, 2017-18 में 49.71 प्रतिशत, 2018-19 में 50.05 प्रतिशत, 2019-20 में 50.70 प्रतिशत और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 50.75 प्रतिशत रही है. राज्य में मनरेगा के तहत महिलाओं को रोजगार देने में दुर्ग जिला अव्वल रहा. मनरेगा कार्यों में इस साल वहां महिलाओं की भागीदीरी 64 प्रतिशत है.
बालोद में कुल सृजित रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत, राजनांदगांव में 59 प्रतिशत, रायपुर में 54 प्रतिशत, बस्तर में 52 प्रतिशत तथा बिलासपुर, धमतरी, कोंडागांव और नारायणपुर में 51-51 प्रतिशत रही. मनरेगा के अंतर्गत विभिन्न हितग्राहीमूलक कार्यों में प्रधानमंत्री आवास निर्माण में श्रम, बकरी आश्रय, मुर्गी आश्रय, मवेशियों के लिए पक्का फर्श, कोटना निर्माण, भूमि समतलीकरण, कूप निर्माण और निजी डबरी निर्माण इत्यादि शामिल रहा.

मनरेगा कार्यों में मजदूरी के साथ ही महिलाएं हितग्राही के तौर पर इन कार्यों का लाभ लेकर कृषि, उद्यानिकी, मछलीपालन, बकरीपालन एवं मुर्गीपालन जैसे कार्यों के जरिए अपनी आजीविका संवर्धित करती रही. मनरेगा प्रावधानों के मुताबिक रोजगार प्रदाय में एक-तिहाई महिलाओं का होना अनिवार्य है. दिव्यांग और अकेली महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया.

छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत बड़े पैमाने पर कार्याें की स्वीकृति दी थी इससे रेाजगार मूलक कार्याें में श्रमिकों को नियोजित करने का काम किया गया. देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान भी राज्य में मनरेगा के कार्य संचालित होने से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई. वैश्विक महामारी के संक्रमण के दौर में महात्मा गांधी मनरेगा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र रहा.लॉकडाउन में एक ओर जहॉ अन्य सभी कार्य बंद थे, वैसे में महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत संचालित कार्य मजदूरों के लिए सार्थक कदम साबित होता रहा. जशपुर जिला मनरेगा में नए कीर्तिमान स्थापित किया है. हितग्राही मूलक कार्यो में सर्वाधिक कार्य स्वीकृति व श्रमिकों को नियोजित करने में राज्य में प्रथम स्थान पर रहा. जिले ने माह मई में मानव दिवस सृजन के लक्ष्य को 100 फीसदी प्राप्त कर लिया था.

मई में मानव दिवस 12 लाख 92 हजार 11 के विरूद्ध में 11 लाख 10 हजार 283 मानव दिवस अर्जित कर लिया गया. इस प्रकार मई महीने के लक्ष्य के विरूद्ध 140 प्रतिशत मानव दिवस अर्जित किया गया. इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जशपुर ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान महात्मा गांधी नरेगा के कार्य प्रारंभ होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई. ग्रामीण कोरोना संक्रमण के रोकथाम व बचाव के सभी निर्देशो का पालन करते हुए मनरेगा के कार्य को संपादित हुए. हितग्राही मूलक व सामुदायिक कार्यो के साथ-साथ कृषि संबंधी कार्य व ’’जल संवर्धन व संरक्षण’’ के अधिकाधिक कार्यो को प्राथमिकता देते हुए योजना का क्रियान्वयन किया गया.

मनरेगा मजदूरों को मिली 2 हजार करोड़ से अधिक की राशि?

चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा के अंतर्गत अब तक 26 लाख नौ हजार परिवारों को सीधे रोजगार उपलब्ध कराते हुए 2148 करोड़ 70 लाख रूपए से अधिक का मजदूरी भुगतान किया गया. इसमें राज्य शासन द्वारा मनरेगा श्रमिकों को उपलब्ध कराए गए 50 अतिरिक्त दिनों के रोजगार के एवज में 96 करोड़ 33 लाख रूपए का मजदूरी भुगतान भी शामिल है.राज्य मनरेगा आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार द्वारा मजदूरी मद में इस वर्ष अब तक कुल 2271 करोड़ 89 लाख रूपए स्वीकृत किए गए. इसमें 67 करोड़ एक लाख रुपए की स्वीकृति 4 सितम्बर को मिली. कुल स्वीकृत राशि में से 2052 करोड़ 37 लाख रूपए प्रदेश को मजदूरी भुगतान के लिए प्राप्त हुआ. योजनांतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 26 लाख से अधिक परिवारों के 48 लाख 87 हजार मनरेगा श्रमिकों को नौ करोड़ 55 लाख मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया. इसमें चार करोड़ 81 लाख मानव दिवस रोजगार 24 लाख 58 हजार महिला श्रमिकों के द्वारा सृजित किया गया.

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ में मनरेगा के लेबर बजट में डेढ़ करोड़ मानव दिवसों की बढ़ोतरी की सैद्धांतिक मंजूरी भी दी थी. राज्य में अब चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए मनरेगा के तहत रोजगार सृजन का लक्ष्य साढ़े 13 करोड़ मानव दिवसों से बढ़कर 15 करोड़ मानव दिवस कर दिया गया. उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इस वर्ष अब तक मनरेगा के अंतर्गत कुल नौ करोड़ 46 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है. इस दौरान 26 लाख से अधिक परिवारों के करीब 48 लाख 70 हजार श्रमिकों को काम दिया गया.वहीं 79 हजार 835 परिवारों को 100 दिनों से अधिक का रोजगार भी मुहैया कराया गया.

देश में 100 दिनों का रोजगार देने वाले कुल परिवारों में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 41 फीसदी?

मनरेगा कार्यों में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन लगातार जारी है. चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा जॉबकॉर्डधारी परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा. अप्रैल, मई और जून में कुल 55 हजार 981 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया गया. देश में 100 दिनों का रोजगार हासिल करने वाले कुल परिवारों में अकेले छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी करीब 41 फीसदी रही.

चालू वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के विरूद्ध रोजगार सृजन के मामले में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा. शुरूआती तीन महीनों में ही यहां सालभर के लक्ष्य का 66 प्रतिशत काम पूर्ण कर लिया गया था. इस दौरान आठ करोड़ 84 लाख 50 हजार मानव दिवस रोजगार का सृजन किया गया. ग्रामीणों को रोजगार देने में नक्सल प्रभावित जिलों ने अच्छा काम किया है. राज्य में लक्ष्य के विरूद्ध सर्वाधिक रोजगार देने वाले पहले पांच जिले बस्तर संभाग के हैं. दस जिलों ने इस वर्ष के लिए स्वीकृत लेबर बजट का 70 प्रतिशत से अधिक काम पूर्ण किया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मनरेगा में लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के चलते लाक-डाउन के बावजूद मनरेगा के अंतर्गत तत्परता से शुरू हुए कार्यों से ग्रामीणों को बड़ी संख्या में सीधे रोजगार मिला. मनरेगा कार्यों ने विपरीत परिस्थितियों में भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशील रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में छत्तीसगढ़ के लिए कुल 13 करोड़ 50 लाख मानव दिवस का लेबर बजट स्वीकृत किया है. वर्ष के प्रथम तीन महीनों में ही प्रदेश ने आठ करोड़ 84 लाख 50 हजार मानव दिवस रोजगार का सृजन कर 66 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया. पहली तिमाही में रोजगार सृजन का राष्ट्रीय औसत 39 प्रतिशत है. राज्य में लक्ष्य के विरूद्ध रोजगार देने में नारायणपुर जिला सबसे आगे रहा. वहां 84 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण किया गया. राज्य के नौ अन्य जिलों ने भी 70 प्रतिशत से अधिक काम पूर्ण कर लिया गया. सुकमा 78 प्रतिशत, बीजापुर 77 प्रतिशत, बस्तर 74 प्रतिशत, कोंडागांव और रायगढ़ 73-73 प्रतिशत, कांकेर और दंतेवाड़ा 72-72 प्रतिशत, कोरबा और गरियाबंद 71-71 प्रतिशत ने भी इस साल के लक्ष्य का 70 प्रतिशत से अधिक हासिल किया गया. शेष 18 जिलों ने भी 60 प्रतिशत से अधिक रोजगार सृजन किया.

जरूरतमंद परिवारों को मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने में भी राज्य में अच्छा काम हुआ है. देश में 100 दिनों का रोजगार प्राप्त करने वाले परिवारों की कुल संख्या एक लाख 37 हजार 365 है. इनमें से 40.75 प्रतिशत यानि 55 हजार 981 परिवार अकेले छत्तीसगढ़ के हैं. राज्य में कबीरधाम जिले में सर्वाधिक 6139 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया गया. इस साल अब तक बिलासपुर में 4410 परिवारों, राजनांदगांव में 3804, धमतरी में 3261, बलौदाबाजार-भाटापारा में 3240, और मुंगेली में 3037 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है.